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छत्तीसगढ़ का राजकीय/राज्य पक्षी कौन सा है? | State Bird Of Chhattisgarh Information In Hindi

इस लेख में हम छत्तीसगढ़ का राजकीय/राज्य पक्षी (State Bird Of Chhattisgarh In Hindi) के बारे में जानकारी साझा कर करे हैं. वर्ष 2001 छत्तीसगढ़ राज्य के गठन उपरांत में राज्य के राजकीय के राजकीय पशु, पक्षी इत्यादि चिन्हित कर घोषित किये हैं. इस लेख में हम छत्तीसगढ़ राजकीय पक्षी के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दे रहे हैं.

State Bird Of Chhattisgarh In Hindi

State Bird Of Chhattisgarh In Hindi

State Bird Of Chhattisgarh In Hindi

छत्तीसगढ़ का राजकीय/राज्य पक्षी कौन सा है?

छत्तीसगढ़ का राजकीय पक्षी “पहाड़ी मैना” है. वर्ष 2002 में इसे छत्तीसगढ़ का राजकीय/राज्य पक्षी (State Bird Of Chhattisgarh In Hindi) घोषित किया गया. मुख्यतः यह बस्तर क्षेत्र में पाई जाती है. इसे “कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान” में संरक्षित किया गया है.

पहाड़ी मैना’ एक छोटे आकार की चिड़िया है, जो Sturnidae परिवार से संबंधित है. इसे अंग्रेजी में “Hill Myna” कहते हैं. इसका वैज्ञानिक नाम “Gracula Religiosa Peninnsularis” है. इसकी सबसे ख़ास बात यह है कि यह हूबहू मनुष्यों की बोली की नक़ल कर लेते हैं.

पहाड़ी मैना पक्षी कैसा होता है?

पहाड़ी मैना चमकीले काले रंग का हल्की हरी आभा वाला पक्षी है. यह आकार में 28 से 30 सेमी लंबा और वजन में 200 ग्राम से 250 ग्राम भारी होता है. बैठे हुए इसके काले पंख ही दिखाई देते हैं, लेकिन उड़ते समय इसके सफ़ेद पंख देखे जा सकते हैं. इसकी मजबूत चोंच नारंगी रंग की होती और पैर पीले रंग के होते हैं. इसके सिर और आँखों के पास पीले रंग के धब्बे होते हैं. नर और मादा पहाड़ी मैना एक समान दिखते हैं. अतः इनमें अंतर कर पाना कठिन होता है.    

पहाड़ी मैना कहाँ पाया जाता है?

पहाड़ी मैना मुख्यतः भारत, श्रीलंका, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया, नेपाल, भूटान, दक्षिणी चीन व दक्षिण पूर्व एशिया में पाया जाता है.

भारत में यह पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्यों के वनों, पश्चिमी घाट और हिमालय के वन क्षेत्रों में पाया जाता है.  

छत्तीसगढ़ में यह बस्तर क्षेत्र के जंगलों में पाई जाती है. दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागाँव, जगदलपुर, कांगेर घातिम गुप्तेश्वर तिरिया क्षेत्र, कुंचा आदि क्षेत्रों में भी इसे विचरण करते देखा जा सकता हैं. ऊँचे-ऊँचे साल के वृक्ष इनका घर हैं. ये कठफोड़वा द्वारा पेड़ों पर बनाये गए खोह में रहती हैं.

पहाड़ी मैना पक्षी कहाँ रहते हैं?

पहाड़ी मैना पहाड़ी क्षेत्रों में सदाबहार सघन और आर्द्र वनों में रहने वाला पक्षी है. इस कारण इसे पहाड़ी वनों के निकट के ग्रामीण क्षेत्रों में देखा जा सकता है. शहरी क्षेत्रों में ये नहीं दिखाई पड़ते. इन्हें ऊँचे-ऊँचे पेड़ों पर रहना पसंद है. भोजन की खोज के अतिरिक्त जमीन पर उतरना ये अधिक पसंद नहीं करते.

पहाड़ी मैना पक्षी क्या खाता है?

पहाड़ी मैना सर्वाहारी पक्षी है. यह छोटे कीड़े-मकोड़े, अनाज के दाने, फल, पत्ती, घास-फूंस खाता है तथा फूलों का रस पीता है.

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पहाड़ी मैना पक्षी के संरक्षण के प्रयास

पहाड़ी मैना की संख्या दिन पर दिन कम होती जा रही है और इसे विलुप्तप्राय पक्षियों में शामिल है. अतः इसके संरक्षण और संवर्धन की दिशा में छत्तीसगढ़ शासन प्रयासरत है.

1. पहाड़ी मैना को ‘कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान’ में संरक्षित किया गया है.

2. बहेलियों की सूचना प्राप्त कर पहाड़ी मैना के अवैध व्यापार पर रोक लगाने के लिए कदम उठाये जा रहे हैं.  

3. पहाड़ी मैना का पता लगाने के लिए एडवांस जी-पी-एस. तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है, यह संपूर्ण डाटा गूगल अर्थ (google earth) में रिकॉर्ड/संग्रहित होगा. इससे उन क्षेत्रों का पता लगाने और चिन्हित करने में सहूलियत होगी, जहाँ पहाड़ी मैना रहती हैं और प्रजनन करती हैं.   

4. पहाड़ी मैना के आवासों का संवर्धन कर इनके संवर्धन के प्रयास भी किये जा रहे हैं. इस लिए उन ऐसे वृक्षों का रोपण किया जा रहा है, जहाँ ये रहते हैं और प्रजनन करते हैं.

पहाड़ी मैना के बारे में रोचक तथ्य (Pahdi Myna Rochak Tathy)

1.पहाड़ी मैना का जीवनकाल औसतन 8 वर्ष होता है.

2. पहाड़ी मैना को ‘mimic bird’ कहा जाता है, जो तोते से भी स्पष्ट मनुष्यों की आवाज़ की नक़ल कर लेती है.

3. झगड़ते समय पहाड़ी मैना बहुत कर्कश आवाज़ निकालती है और पंखों का इस्तेमाल कर लड़ती हैं.

4. पहाड़ी मैना समाजिक पक्षी है, जो समूह बनाकर रहते हैं. ये 2 से 8 के समूह में रहते हैं.

5. पहाड़ी मैना पाने साथी के प्रति वफ़ादार होते हैं और अपने साथी से बिछड़ जाने पर किसी दूसरे साथी के साथ प्रजनन करना पसंद नहीं करते.

6. पहाड़ी मैना का प्रजनन काल मार्च से अक्टूबर तक होता है.

7. ये एक बार में 2 से 3 अंडे देती हैं.

8. इनके अंडे गहरे नीले रंग के होते हैं, जिसमें लाल-भूरे स्पॉट्स होते हैं.

9. यह 14 से 18 दिन तक अंडों को सेते हैं. अंडों को सेने और उसकी देखभाल का कार्य नर और मादा पहाड़ी मैना दोनों मिलकर करते है. अंडों से बच्चे निकलने के बाद उनके पालन-पोषण की जिम्मेदारी भी दोनों साथ मिलकर निभाते हैं.

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