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आलसी गधे की कहानी | Aalsi Gadhe Ki Kahani

आलसी गधे की कहानी (Aalsi Gadhe Ki Kahani) इस पोस्ट में हम शेयर कर रहे हैं। Lazy Donkey Story In Hindi एक आलसी गधे की कहानी है, जो आलस केकरण कामचोरी करता है। किसान कैसे उसे सबक सिखाता है। पढ़िए :

Aalsi Gadhe Ki Kahani

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Aalsi Gadhe Ki Kahani

किसी छोटे गाँव में एक किसान रहता था, जिसका नाम मोहन था। मोहन के पास एक गधा था, जिसका नाम था भोला। भोला एक बेहद आलसी गधा था, जिसे काम करना बिल्कुल पसंद नहीं था। लेकिन मोहन के पास और कोई सहारा नहीं था, इसलिए उसे भोला के साथ ही काम करना पड़ता था।

हर सुबह मोहन खेतों में काम करने जाता था और भोला को भी साथ ले जाता था। भोला काम तो करता, लेकिन मन ही मन काम से बचने का बहाना सोचता रहता। 

एक दिन जब मोहन ने भोला को काम पर ले जाने की तैयारी की, तो भोला लंगड़ाकर चलने लगा और बोला, “मालिक, मेरे पैर में बहुत दर्द हो रहा है। मैं आज काम नहीं कर सकता।”

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मोहन ने सोचा कि शायद भोला सच में बीमार है। उसने भोला को आँगन में बाँध दिया और कहा, “ठीक है, तुम आराम करो। मैं खुद खेतों में काम करने चला जाऊँगा।” मोहन खेतों में चला गया। दिन भर वह कड़ी मेहनत कर जब शाम को खेत से वापस आया, तो उसने देखा कि भोला बड़े आराम से खड़ा है। उसे पक्का यकीन हो गया कि भोला काम से बचने के लिए नाटक कर रहा है। मोहन ने सोचा कि अब भोला को एक सबक सिखाना जरूरी है।

अगले दिन मोहन ने एक योजना बनाई। उसने जंगल से एक बड़ा सा शेर की खाल का टुकड़ा और एक नकली शेर की आवाज निकालने वाला यंत्र लिया। रात को जब सब सो रहे थे, तो मोहन ने शेर की खाल पहन ली और शेर की आवाज निकालने वाला यंत्र अपने मुँह में रख लिया। उसने धीरे-धीरे आँगन की ओर बढ़ना शुरू किया।

आँगन में बँधा भोला आराम से सो रहा था। अचानक, उसे शेर की दहाड़ सुनाई दी। उसने आँखें खोलीं और देखा कि एक विशाल शेर उसकी ओर बढ़ रहा है। भोला डर के मारे काँपने लगा। शेर की आवाज और उसकी खाल देखकर भोला के होश उड़ गए। उसने सोचा, “अगर मैं यहाँ रुका रहा, तो यह शेर मुझे खा जाएगा।”

भोला ने अपने पैर की तकलीफ भूलकर पूरी ताकत से दौड़ने लगा। वह आँगन से भागकर सीधा गाँव की गलियों में निकल गया। कुछ देर बाद भोला थक कर एक पेड़ के नीचे गिर पड़ा। उसमें अब दौड़ने की शक्ति बाकी नहीं रह गई थी। शेर की खाल में मोहन उसके करीब पहुंच गया। भोला की घिग्घी बंध गई।

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तब मोहन ने शेर की खाल उतारी wur भोला से बोला, “तुम्हारे नाटक का पर्दाफाश हो चुका है। अब मैं तुम्हें अपने घर नहीं रखूंगा, तुम्हें जंगल में छोड़ दूंगा, ताकि वहां कोई असली शेर तुम्हें खा ले।”

भोला ने शर्मिंदा होकर सिर झुका लिया और मोहन से माफी माँगी। उसने कहा, “मालिक, मुझे माफ कर दो। मैं वादा करता हूँ कि अब से मैं पूरी मेहनत से काम करूँगा और कभी कामचोरी नहीं करूंगा।”

मोहन ने भोला को माफ कर दिया और उसे गले लगाकर कहा, “तुम्हें माफ किया भोला, लेकिन याद रखना कि मेहनत और ईमानदारी ही जीवन को सुखमय बनाते हैं।”

भोला ने अपने वादे को निभाया और पूरी मेहनत से काम करने लगा। उसने समझ लिया कि काम से बचने की बजाय मेहनत से काम करना ही सही रास्ता है। धीरे-धीरे भोला गाँव में एक मेहनती और ईमानदार गधा बन गया। गाँव के लोग उसकी मेहनत की तारीफ करने लगे और मोहन को भी उस पर गर्व महसूस होने लगा।

सीख (Lazy Donkey Story Moral In Hindi)

भोला की इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि छल-कपट से जीवन में कुछ भी हासिल नहीं होता। मेहनत और ईमानदारी ही सच्चे सुख और सफलता की कुंजी है। भोला ने अपनी मूर्खता से सबक लिया और अपने जीवन को बदलने का प्रयास किया। इसी तरह, हमें भी अपनी गलतियों से सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए और मेहनत से अपने लक्ष्यों को प्राप्त करना चाहिए।

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